पिछले साल हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू ने दुनिया के दस सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सीईओ की सूची जारी की । इस सूची में छठे स्थान पर भारतीय मूल के शांतनु नारायण का नाम है , जिन्हें 2019 में भारत सरकार पद्मश्री से पुरस्कृत कर चुकी है । शांतनु नारायण ने अपना करियर एपल कंपनी से शुरू किया फिर वे एडोब कंपनी में आ गए । उनके शब्दों में ' जिज्ञासा ही एक ऐसी चीज है , जिसे मैंने जीवन में सबसे अधिक महत्व दिया । मैंने कंपनी में सही सवाल पूछने को , एक्सप्लोर करने तथा प्रयोग करने को प्रोत्साहन दिया । ' इसलिए आप भी कौन , कहां , कब , कैसे , क्यों . . . जैसे शब्दों से घबराइए नहीं और न ही सवाल पूछने से संकोच कीजिए । यही छोटी - छोटी बातें आपको ' ऑलराउंडर ' बना सकती हैं । आइए जानें , कैसे ये अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं . . . . लॉर्ड मैकाले की हमेशा यह कहकर आलोचना की जाती है कि उन्होंने भारत में क्लर्क पैदा करने की शिक्षा पद्धति बनाई , लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने कुछ और भी कहा था । मैकाले ने कहा था कि मुझसे सब कुछ ले लो , सिर्फ दो चीजें मेरे पास रहने दो , जिज्ञासा और आमोद - प्रमोद । जब धरती पर मनुष्य आए तो वे उन मनुष्यों की तरह नहीं थे , जिन्हें हम आज देखते हैं । वे जंगली थे तथा जानवरों में और उनमें बहुत कम फर्क था । धीरे - धीरे उनमें सोचने की ताकत आई । इसी ताकत ने उन्हें जानवरों से अलग कर दिया । इसके कारण ही एक छोटा - सा मनुष्य एक बड़े हाथी के सिर पर बैठकर उससे जो चाहता है , करवा लेता है । यह तो मात्र एक उदाहरण है । ऐसी और भी कई बातें हैं । कहने का मतलब यह है कि जिज्ञासा ने आदमी को कहां से कहां पहंचा दिया । पं . जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि आदमी और पशु में शायद इसलिए भेद है कि आदमी में जिज्ञासा होती है , जबकि पशु में जिज्ञासा नहीं होती । आदमी में अगर चीजों , घटनाओं और व्यवस्थाओं के बारे में जिज्ञासा न होती , तो वह कभी भी प्रगति न कर पाता । अतः जिसमें जिज्ञासा हो वह आदमी हर किसी से हर पल कुछ न कुछ सीख सकता है ।
निर्धारित कीजिए लक्ष्य : हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी फील्ड का क्यों न हो , अपनी क्षमता को पहचाने तथा उसी के अनुख्य कार्य करे । लगातार ध्यान रखें कि आप कहां गलत साबित हो रहे हैं ।
जो भी पढ़ें , उसमें में : इंदिरा गांधी ने एक जगह लिखा था कि प्रायः बच्चे अपने माता - पिता को आराध्य मानते हैं , लेकिन मेरे पिता हर चीज में रुचि रखते थे । उन्होंने मुझे कंकड़ - पत्थर , पेड़ - पौधों तथा कीड़े - मकोड़े के जीवन तथा रातों के पहरेदार सितारों तक का दिलचस्प इतिहास बताया । अतः जिज्ञासा से आप नित नए अनुभव पाते हैं । सीखने की उम्र नहीं आधुनिकीकरण के साथ कारोबार की जटिलताएं भी बढ़ती जा रही हैं , इसलिए जब भी मौका मिले तो नई जानकारी हासिल करें । अगर हौसला हो तो किसी भी उम्र में इंसान कुछ भी नया कर सकता है ।
छोटी शुरुआत , अच्छी शुरुआत : कड़ी मेहनत और अनुशासन ही सफलता का असली मार्ग है । यदि आपमें यह हुनर है , तो बस चूकिए नहीं । किसी भी क्षेत्र _ _ में सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे नीचे की सीढ़ी चुनें । खड़े होकर इमारत की ऊंचाई भर नापने मात्र से सबसे ऊपर की मंजिल पर नहीं पहुंचा जा सकता । अतः छोटी शुरुआत , अच्छी शुरुआत । वैसे भी , मानवता तथा समाज के लिए हम उपयोगी तभी हो सकते हैं , जब हम खुशियां बिखेरने वाले बनें ।
रेणु जैन
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