बनें कामयाबी के हकदार


जीवन की लंबी यात्रा में कई उतार- चढ़ाव आते हैं। सफलता-असफलता से हम रूबरू होते हैं। इसमें अस्वाभाविक कुछ भी नहीं। सच कहें तो अनुकूल एवं प्रतिकूल दोनों ही अवस्था में जब हम खुद से प्यार करते रहते हैं, तभी हम सफलता या असफलता का सही आकलन- विश्लेषण कर पाते हैं। और तो और इससे हमें आगे की कार्ययोजना को बेहतर बनाकर वथासाध्व कोशिश करते रहने की प्रेरणा भी मिलती है।


 पहले खुद को जानें-समझें : प्रसिद्ध अमेरिकी गायिका, मॉडल और अभिनेत्री लूसली बॉल का स्पष्ट कहना है, 'पहले खुद से प्यार करें, बाकी सब कुछ स्वतः ठीक होता जाएगा। इस संसार में कुछ भी करने के लिए आपको वाकई खुद से प्यार करना होगा।' दरअसल, जीवन में कामयाबी की संख्या को सहजता से बढ़ाते रहने के लिए खुद से प्यार

सॉल्यूशन फाइंडर
 घर हो या बाहर, हमें आए दिन किसी-न-किसी समस्या का सामना करना पड़ता है वर्क प्लेस में तो अमूमन ऐसी स्थिति दिन में कई बार आती है | कभी समस्या छेटी होती है तो कई बार बड़ी और बहुत गंभीर | हर जगह चुनौती और अपेक्षा यह होती है कि समस्या से सफलतापूर्वक कैसे निबटा जाए और अंतत : समाधान तक पहुंचा जाए | हर नियोक्‍ता या उच्च अधिकारी भी यही चाहते हैं कि उनके कर्मी ऐसे खुले दिमागवाले हों, जो हर चुनौती या समस्या को सॉल्यूशन फाइंडर' की दृष्टि से देखें और समस्या का हर संभव समाधान करें । 

करना तो अनिवार्य शर्त है ही, साथ ही सफलता की यात्रा में मजबूती से आगे बढ़ते रहने के लिए कुछ और सरल व अहम सूत्रों को जानना, समझना और उन्हें ठीक से आत्मसात करके उन पर अमल करना भी जरूरी है। पहले खुद को अच्छी तरह जानें, जैसे-हमारे सपने, हमारी इच्छाएं, जीवन का मुख्य लक्ष्य, हमारे व्यक्तित्व की खूबियां और खामियां आदि। इन बातों पर निरपेक्ष भाव से अच्छी तरह गौर करें और उन्हें एक कागज पर लिख लें। इससे हमें अच्छी तरह पता हो जाता है कि हमारे मजबूत पहलू क्या हैं और हम किन मामलों में कमजोर हैं। उस फैक्ट शीट के आघार पर अगर हम लगातार अपने मजबूत पक्ष को और मजबूत करते रहें और साथ में अपनी कमजोरियों को कम करते रहें, तो कुछ महीनों में ही हमें अपने व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव साफ दिखने लगेगा। स्वाभाविक रूप से हमारी कार्यक्षमता और उत्पादकता पर इसका जबरदस्त असर भी होगा।

समय का वेहतर उपयोग: मार्टिन लुूथर किंग जूनियर कहते हैं कि अच्छा कार्य करने के लिए हर समव अच्छा झेता है। बीता हुआ वक्‍त कभी लौट कर नहीं आता। लिहाजा, हमारे शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म एजेंडा में जो भी कार्य शामिल किए गए हैं, उन्हें निर्धारित समय पर शुरू और संपन्न करना जरूरी है। हां, जिस समय जो काम करें पूरे मनोयोग से करें और उसे एन्जॉय करें। चाणक्य ने कहा है, 'जब भी किसी काम को आरंभ करें, असफलता से मत डरें और उस काम को बीच में न छोड़ें। जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं वे कहीं ज्यादा खुश रहते हैं।'

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