कहीं आपमें भी तो नहीं ऐसी आदतें


कई बार अनजाने में ही हम कुछ ऐसी आदतें पाल लेते हैं जो हमें न सिर्फ आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं, बल्कि वर्कप्लेस और सोशल सर्कल में भी हमारी छवि खराब कर देती हैं। कभी - कभी अपनी इन आदतों की वजह से हम लोगों की हंसी के पात्र भी बन जाते हैं। ऐसी आदतों के कारण लोग हमें गंभीरता से नहीं लेते और इसका खामियाजा हमें बिजनेस न मिलने या प्रतिष्ठा में ह्रास के रूप भुगतना पड़ता है। कई लोगों में इस तरह की कई आदतें मिल जाएंगी, जिनसे बचना जरूरी है। 

डींगें हांकना : 
घर हो या वर्कप्लेस, कुछ लोग हर जगह लंबी - लंबी डींग हांकते हैं । हर किसी को बताते फिरते हैं कि अमुक काम उनकी ही वजह से हुआ है , कंपनी आज जिस ऊंचाई पर है , उसमें उनकी भूमिका सबसे ज्यादा है आदि। यह आदत अहंकार का परिचायक होती है। किसी भी परिवार में या कंपनी में किसी भी तरह के अचीवमेंट में हमेशा टीमवर्क ही होता है। भले ही किसी की भूमिका कम हो या ज्यादा। इसलिए दूसरों को कमतर आंकने और खुद को सबसे बेहतर समझने वाले लोगों को कोई पसंद नहीं करता। नतीजतन ऐसे लोगों को कोई सपोर्ट करना भी पसंद नहीं करता , क्योंकि सब जानते हैं कि सारा श्रेय अंत में मिस्टर या मिसेज डींग ही बटोरने वाले हैं। ऐसे में इन्हें वक्त पड़ने पर किसी का सहारा नहीं मिलता। 

आज का काम कल पर टालना 
अगर आप भी कोई काम आने पर उसे कल के लिए टाल देते हैं तो याद रखें कि आप कभी सफल नहीं हो पाएंगे। कल कभी नहीं आता और आपका कामहमेशा टलता रहता है। इससे आपके बॉस आपसे चिढ़ने लगते हैं और सहकर्मी भी आपको हेय दृष्टि से देखते हैं। वर्कप्लेसही नहीं, घर में भी इस आदत की वजह से आपकी इमेजखराब हो जाती है।आलस्यकी वजह से आपका काम कभी पूरा नहीं हो पाता और आप कभी आगे बढ़ ही नहीं पाते । यदि आप में भी इनमें से कोई आदत हो तो जल्दी से जल्दी इनसे छुटकारा पालें।

दूसरों पर दोष थोपनाः 
किसी - किसी की आदत होती है कि किसी भी काम में कोई गड़बड़ी हो जाए या सफलता हासिल न हो तो खुद पल्ला झाड़कर दूर खड़े हो जाएंगे और सारा दोष अपने परिजनों या टीम के दूसरे साथियों पर थोप देंगे। ऐसे लोगों को कहीं भी पसंद नहीं किया जाता, क्योंकि किसी भी प्रोजेक्ट या काम की सफलता अथवा असफलता में सब का हाथ होता है. किसी अकेले व्यक्ति का नहीं इसलिए इस तरह की बातों से जितना बचा जाए , उतना ही अच्छा। 

विक्टिम कार्ड खेलना : 
कुछ लोग हमेशा खुद को वक्त का मारा या दूसरों द्वारा सताया बताते रहते हैं और हर किसी से सहानुभूति की उम्मीद करते हैं। इनमें न तो कोई प्रॉब्लम सॉल्व करने की क्षमता होती है और न ही किसी काम को अंजाम देने की। अपनी असफलताओं या जमाने से पिछड़ जाने के लिए ये कभी अपनी खराब सेहत का रोना रोते हैं तो कभी खराब मूड का। जब कुछ समझ में नहीं आता तो ऐसे लोग अपनी किस्मत को कोसते हैं। हर वक्त निगेटिव ख्याल प्रकट करने और रोते - धोते रहने के कारण ऐसे लोगों के पास फटकने में भी सब डरते हैं।

हर वक्त चुगली करना : कई लोग हर वक्त एक व्यक्ति की बात दूसरे व्यक्ति को बताते रहते हैं , जो सामने न हो उसके बारे में कुछ न कुछ बातें करते हैं और उसकी बराई करते हैं।

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